मंगलवार, 21 जून 2011

तेरी इस दुनिया में ये मंजर क्यों है???

कही जख्म तो कही पीठ में खंजर क्यों है???

सुना है की तू हर जर्रे में रहता है,
तो फिर जमीन पे कही मंदिर तो,
कही मस्जिद क्यों है???

जब इस दुनिया में रहने वाले सभी है तेरे बच्चे,
तो फिर कोई किसी का दोस्त,
कोई दुश्मन क्यों है???

जब नहीं नकार सकी है दुनिया तेरे वजूद को,
तो फिर कही तेरी रज़ा से खुशिया तो,
तो कही गम का सिलसिला क्यों है???

मै तो मानता  आया हु सदा से तेरी हुकूमत ,
तो आज मेरे खुदा ये तो  बता दे,
तेरे " सूरज " के दिल में ये "क्यों" आखिर क्यों है???

आखिर क्यों है ???

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