गुरुवार, 19 अक्टूबर 2017

सुप्रभात जिंदगी।
सुबह...आहा सुबह...वाह...सुबह...
और उससे भी वाह वाह भोर।
शायद किसी ने मरने के के बाद फिरसे जीकर न देख हो,
लेकिन इस ही अहसास देती हैं ...सुबह।
रोज एक नई जिंदगी,
फिर से बनने,सँवरने को तैयार।
जिम्मेदारी हम पर हैं कि हम उस नई जिंदगी के साथ क्या करते हैं!!!

नमस्कार दोस्तों,
सूरज का अड्डा ब्लॉग में आप सबका फिर से स्वागत।
जिंदगी जीते जीते जिंदगी ही कही पीछे छूट गयी थी।
आज फिर से बढ़े हैं जिंदगी की ओर।
कोई लक्ष्य नहीं कुछ खास पाने का।
उम्मीद हैं तो बस खुद को पाने की।
मिलते रहेंगे अब...😊